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आज के महत्वपूर्ण आलेख 25th May 2017 by IASToppers

ईरान पर ट्रंप के निशाने के निहितार्थ; महिला कामगारों की दशा-दिशा; तकनीकी शिक्षा और सिमटती नौकरियां; खानपान की शहरी आदते; बैंकों का फंसा हुआ कर्ज और एआरसी; स्वास्थ्य सम्बन्धी प्रशासनिक विफलता; कैशलेस इकोनोमी
By IT's Selection Team
May 25, 2017

Contents

  • महिला कामगारों की दशा-दिशा
  • ईरान पर ट्रंप के निशाने के निहितार्थ
  • भावनात्मक रूप से जुड़ेंगे लोग
  • बैंकों का फंसा हुआ कर्ज और एआरसी
  • प्रशासनिक विफलता
  • नई पीढ़ी को जम रहा है कैशलेस
  • तकनीकी शिक्षा और सिमटती नौकरियां

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ias toppers Dainik Jagran

महिला कामगारों की दशा-दिशा

सन्दर्भ:

महिला कामगारों की दशा और दिशा के क्षेत्र में विश्व श्रम संगठन की रपट भारत को 131 देशों की तालिका में 121वां स्थान देती है।

ias toppers Dainik Tribune

ईरान पर ट्रंप के निशाने के निहितार्थ

सन्दर्भ:

ईरानियों को लगता है कि सऊदी अरब से लेकर इस्राइल की यात्रा के दौरान ट्रंप के दिमाग़ में कोई खुराफात चल रही थी, जिसके ख़तरनाक नतीज़े आने वाले दिनों में शायद मध्य-पूर्व के देशों को देखने को मिलें।

 

भावनात्मक रूप से जुड़ेंगे लोग

सन्दर्भ:

खानपान की शहरी आदतों पर हमारी नजर तभी जाती है जब उससे जुड़ा कोई सर्वेक्षण-अध्ययन हमारे सामने आता है और यह बताता है कि ज्यादातर शहरियों को बीमार बनाने के पीछे उनका आरामतलब लाइफस्टाइल और जंक फूड से भरपूर भोजन है।

ias toppers Business Standard

बैंकों का फंसा हुआ कर्ज और एआरसी

सन्दर्भ:

बैंक अपनी फंसी परिसंपत्ति मूल्य कम करने के लिए तैयार नहीं हैं। जबकि एआरसी को ऐसी कीमत स्वीकार्य नहीं है। इसकी वजह से फंसे कर्ज के निपटान में दिक्कत आ रही है

 

प्रशासनिक विफलता

सन्दर्भ:

चिकनगुनिया, डेंगू, मलेरिया आदि मच्छरों से फैलने वाली तमाम अन्य बीमारियों ने इस वर्ष देश के कई हिस्सों में आमतौर पर पहले हमला बोल दिया है। यह इस बात का संकेत है कि स्वास्थ्य विभाग बचाव के उचित उपाय अपनाने में नाकाम रहा है।

Navbharat

नई पीढ़ी को जम रहा है कैशलेस

सन्दर्भ:

पर्स में पैसे लेकर चलना या एटीएम पर भरोसा करना अब बीते दिनों की बात

ias toppers Jansatta

तकनीकी शिक्षा और सिमटती नौकरियां

सन्दर्भ:

तकनीकी शिक्षा कहीं न कहीं साहित्य और भाषाई विषयों के शैक्षिक दर्शन की दृष्टि से अलग है। अगर विज्ञान और तकनीक को शिक्षा-दर्शन की नजर से देखने-समझने की कोशिश करें तो दोनों में बुनियादी अंतर दिखाई देता है। तकनीक जहां आंकड़ों, यथार्थ, सत्यता और प्रामाणिकता पर जोर देती है, वहीं साहित्य सृजन की वैयक्तिक भिन्नता पर निर्भर है।

 

 

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